• Deepawali Puja (दीपावली विशेष पूजन)

Deepawali Puja (दीपावली विशेष पूजन)

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दीपावली पर्व के पीछे कथा (Story of Deepawali in Hindi)

अपने प्रिय राजा श्री राम के वनवास समाप्त होने की खुशी में अयोध्यावासियों ने कार्तिक अमावस्या की रात्रि में घी के दिए जलाकर उत्सव मनाया था। तभी से हर वर्ष दीपावली का पर्व मनाया जाता है। इस त्यौहार का वर्णन विष्णु पुराण में किया गया है।

दीपावली पर लक्ष्मी पूजा (Deepawali Pooja Vidhi Hindi)

आज अधिकांश घरों में दीपावली के दिन लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा की जाती है। हिन्दू मान्यतानुसार अमावस्या की रात्रि में लक्ष्मी जी धरती पर भ्रमण करती हैं और लोगों को वैभव का आशीष देती है। दीपावली के दिन गणेश जी की पूजा का यूं तो कोई उल्लेख नहीं परंतु उनकी पूजा के बिना हर पूजा अधूरी मानी जाती है। इसलिए लक्ष्मी जी के साथ विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की भी पूजा की जाती है। 

दीवाली हिन्दूओं के मुख्य त्यौहारों में एक है। इस वर्ष दीवाली 11 नवंबर 2015 को मनाई जाएगी। दीवाली भगवान श्री राम के अयोध्या वापसी की खुशी में मनाई जाती है। इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा का विधान है।

पूजा में आवश्यक साम्रगी: इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा में दीपक, कमल के फूल, जावित्री, लड्डू आदि को अवश्य शामिल करना चाहिए। नारदपुराण के अनुसार कमल के फूल तो माता लक्ष्मी को अतिप्रिय होते हैं। पूजा करने के लिए उत्तर या पूर्व दिशा में मुख करना चाहिए। 

पूजा विधि (Laxmi Puja Vidhi on Diwali): स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन प्रात: काल स्नान आदि से निवृत होकर सभी देवताओं की पूजा करनी चाहिए। इस दिन संभव हो तो दिन में भोजन नहीं करना चाहिए। इसके बाद प्रदोष काल में माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। माता की स्तुति और पूजा के बाद दीप दान करना चाहिए। 

लक्ष्मी मंत्र (Laxmi Mantra in Hindi): लक्ष्मी जी की पूजा के समय निम्न मंत्र का लगातार उच्चारण करते रहें: 

ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम: ॥

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